नोबेल पुरस्कार की चयन प्रक्रिया क्या है?

नोबल पुरस्कार की चयन प्रक्रिया

प्रति वर्ष नोबेल पुरुष्कार के प्रत्येक विषय से सम्बंधित समिति अपने विषय के हजारो लोगो को पत्र लिख कर आने वाले वर्ष के लिए संभावित नोबल पुरस्कार विजेता (नोबल लांरिएट) का नाम भेजने का अनुरोध करती है। जिनको यह अनुरोध पत्र भेजा जाता है, उनमें शैक्षिक प्रतिभाएं, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, विभिन्न देशो के वैज्ञानिक , पूर्व वर्षो के नोबल पुरस्कार विजेता , संसद व विधान सभाओं के सदस्य व अन्य लोग होते है। नोबेल पुरस्कार के इन प्रस्तावको का चयन इस प्रकार किया जाता है कि एक समयावधि में अधिक से अधिक देशो व विश्वविद्यालययों को अवसर मिल सके। नोबल पुरस्कार विषय समित पुरस्कार के प्रस्तावको का चयन करते समय उनकी योग्यता पर पूर्ण विचार करके ही उन्हें अनुरोध पत्र भेजती है। प्रस्तावको के नाम पूर्णतया गुप्त रखे जाते है, ताकि कोई उन्हें प्रभावित करने का प्रयास न कर सके। प्रस्तावको में रॉयल स्वीडिश विज्ञान एकेडमी के सदस्य , विषय के पूर्व नोबल विजेता , स्वीडेन, डेनमार्क, फ़िनलैंड, आइसलैंड तथा नार्वे के विश्वविद्यालयों व कैरोलिंस्का संस्थान, स्काटहोम में नियुक्त स्थायी सहायक प्रोफ़ेसर तथा स्वीडिश विज्ञान अकादमी द्वारा स्वीकृत अन्य लोग सम्लित होते हैं। इनके अतिरिक्त कोई अन्य किसी नाम का प्रस्ताव नहीं कर सकता।


नोबेल पुरस्कार हेतु प्रस्तावित नाम व उससे सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी पूर्णतया गोपनीय होती है। पुरस्कार के लिए नाम प्रस्तावित करते समय प्रस्तावक को इस शर्त के पालन का आश्वासन देना होता है कि प्रस्तावित नाम व उससे संवंधित किसी भी प्रकार की सुचना आगामी 50 वर्षो तक किसी भी प्रकार से किसी को भी प्रकट नहीं की जाएगी।


नोबल पुरस्कार के लिए नाम प्रस्तावित करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया समयबद्ध चलती रहती है। कार्यवाही लगभग 1 वर्ष पूर्व ही प्रारंभ हो जाती है। जिस वर्ष के लिए चयन होना है उसके पूर्व वर्ष के सितम्वर माह में नोबल पुरस्कार के प्रस्तावको को वे प्रपत्र भेज दिए जाते है, जिनमे उन्हें नाम प्रस्तावित करने होते है। प्रस्तावित वर्ष का फरवरी माह में नामों के प्रस्ताव विषय समिति तक पहुँचने की अंतिम तिथि होती है। इस तिथि के बाद पहुँचे प्रस्तावों पर उस वर्ष विचार नहीं किया जाता है। मार्च से मई तक प्रतेक विषय के लिए विशेष चयन समिति का गठन कर लिया जाता है। विषय समितियां जून से अगस्त तक अपनी-अपनी रिपोर्ट तैयार करती है। रिपोर्ट 5 या 6 पैराग्राफ में लिखी जाती है। सितम्वर माह में रेपोर रॉयल स्वीडिश विज्ञान एकेडेमी को सौप दी जाती है।


  भौतिक व रसायन शास्त्र के पुरस्कार विजेताओ के अंतिम चयन की जिम्मेदारी रॉयल स्वीडिश विज्ञान अकादमी के लिए होती है। विषय समिति द्वारा सुझाये नामों में से एक या अधिक का चुनाव 5 सदस्यों वाली कमेटी करती है। आजकल इस समिति में और सदस्य भी रखे जाने लगे है। चयन समिति के सभी सदस्यों के वोट का सामान महत्व होता है। मतभेद होने पर फैसला बहुमत के आधार पर होता है। औषध या शारीर-क्रिया विज्ञान के विजेता का चयन कैरोलिंस्का संसथान की नोबल सभा द्वारा किया जाता है। इसके 50 सदस्य होते है जो उक्त संसथान के औषध विज्ञान के प्रोफ़ेसर होते है। इनमे से तीन वर्ष के लिए एक कार्यकारी समिति चुनी जाती है जो चयन प्रक्रिया का संचालन करती है किसी भी विषय में एक या अधिक्तन तीन विजेता होते है। राशि का चयन कैसे किया जाना है, उसकी व्यवस्था चयन समिति अपने निर्णय के साथ ही बता देती है। पुरस्कार योग्य व्यक्ति को ही मिले, इसका पूरा प्रयास किया जाता है। किसी वर्ष नोबल पुरस्कार को कोई भी प्रस्ताव पुरस्कार के योग्य लगे तो उस वर्ष उस विषय में नोबल पुरस्कार की घोषणा नहीं की जाती है। प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई बार कई विषयों में नोबल पुरस्कारों की घोषणा नहीं हो सकी थी।


  केवल जीवित व्यक्तियों को ही नोबेल पुरस्कार हेतु चुना जाता है। चयन के बाद मृत्यु हो जाने पर पुरस्कार दिया जाता है। एक बार औषध या शरीर-क्रियाविज्ञान का नोबेल पुरस्कार राल्फ एम् स्टीनमैन को मरणोप्रान्त मिला था। स्टीनमैन की मृत्यु उनके चयन की घोषणा से चार दिन पूर्व हो गयी थी। इसकी सुचना चयन समिति के पास नहीं थी। चयन समिति ने तो स्टीनमैन को जीवित मान कर ही पुरस्कार की घोषणा की थी। बाद में स्टीनमैन की मृत्यु की सुचना मिलने पर भी समिति ने अपना निर्णय नहीं बदला। स्टीनमैन के परिवार को पुरस्कार प्रदान किया गया।

नामों की घोषणा

   अक्टूबर माह में नामों का चयन किया जाता है। निश्चित निर्धारित तिथि को ही नामों की घोषणा की जाती है। एक दिन में एक ही विषय के नामों की घोषणा की जाती है। सर्व प्रथम औषध या शारीर-क्रियाविज्ञान , उसके बाद भौतिकी बाद में रसायन उसके बाद शांति , फिर अर्थशास्त्र तथा सबसे अंत में साहित्य के नोबल पुरस्कार की घोषणा की जाती है।

पुरस्कारों का वितरण

  पुरस्कारों का वितरण प्रतिवर्ष अल्फ्रेड नोबेल के पूण्यतिथि पर 10 दिसम्बर को किया जाता है। पुरस्कार के रूप में एक स्वर्ण पदक, एक प्रमाण पत्र तथा नकद धनराशि दी जाती है। विजेताओ को निमंत्रण भेज कर 10 दिसम्बर से पूर्व ही बुला लिया जाता है। नोबेल पुरस्कार विजेता एक सप्ताह तक चलने वाले कार्यक्रमों में नोबेल समिति के अतिथि होते हैं।
  1980 से नोबेल मेडल की संहति 200 ग्राम की होती है। पहले मेडल 23 कैरेट सोने का होता था, मगर आजकल मेडल 18 कैरेट का बनाया जाता है, तथा उस पर 24 कैरेट सोने की पोलिस की जाती है। मेडल पर एक ओर अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबल का चित्र तथा उनकी जन्म व मृत्यु की तिथि अंकित होती है। रॉयल स्वीडिश विज्ञान अकादमी द्वारा देय भौतिकी व रसायन शास्त्र के मेडल के पृष्ठ भाग एक समान होते हैं। उस पर एक देवी को चित्रित किया गया है। देवी के चेहरे को ढक रहे घूँघट जैसे आवरण को विज्ञान प्रतिभा द्वारा उठाते हुए दिखाया गया जो अज्ञान का पर्दा हटाने का प्रतीक है। देवी के बगल में शांति के प्रतीक फूलों का गुच्छा बनाया गया है। कैरोलिंस्का संस्थान देय औषधि या शारीर क्रिया-विज्ञान के मेडल के पृष्ठ पर औषध की प्रतिमा को देवी रूप में बैठे हुए चित्रित किया गया है। अध्ययन की निरंतरता के प्रतीक के रूप में देवी की गोद में एक खुली हुई पुस्तक दिखाई गयी है। साथ ही रोगी के उपचार में अथक प्रयास के प्रतीक स्वरुप देवी को एक बच्ची की प्यास बुझाने हेतु एक चट्टान से गिरते पानी को एकत्रित करते हुए दिखाया गया है।

नोबल भाषण

  नोबल भाषण नोबल पुरस्कार वितरण समारोह का एक प्रमुख अंग होता है। प्रत्येक नोबल पुरस्कार विजेता को अपने विषय से सम्बंधित भाषण देना अनिवार्य है। यह भाषण पुरस्कार वितरण तिथि से 6 माह की अवधि में कभी भी दिया जा सकता है। विषय से सम्बंधित समिति ही नोबल भाषण की व्यवस्था करती है।

नोबल संगीत सभा

  नोबल संगीत सभा (कन्सर्ट) का आयोजन स्कॉटहोम की संगीत शाला में किया जाता है। इसमें विश्व स्तर के किसी संगीतज्ञ को प्रस्तुति के लिए अनुबंधित किया जाता है। संगीत सभा के टिकिट बहुत समय पहले ही बिकने प्रारंभ हो जाते है। नोबल पुरस्कार समारोह प्रतिवर्ष 10 दिसंबर को स्कॉटहोम के नगर सभागार में होता है। सभागार में नोबल पुरस्कार विजेताओं को सम्मान पूर्वक मंच पर लाया जाता है। मंच पर उन्हें केंद्र में स्थान प्रदान किया जाता है। प्रत्येक विजेता की प्रशस्ति पढ़ कर सुनाई जाती है। फिर उन्हें पुरस्कार प्राप्त करने को पुकारा जाता है। स्वीडन के राजा विजेता को प्रमाण पत्र व मेडल प्रदान करते है। रात्रि में विजेताओ के सम्मान में भोज का आयोजन किया जाता है। इसमें लगभग 1300 लोग आमंत्रित होते हैं। भोज का सम्पूर्ण कार्यक्रम पूर्णतया परम्परागत व औपचरिक होता है। इस बात का ध्यान रखा जाता है कि भोज में उपलव्ध खाद्य सामग्री क्षेत्रीयता का प्रतिनिधित्व करने वाली हो। भोज में भाग लेने वालों के लिए निर्धारित वस्त्र पहनने जरूरी होते हैं। पुरुषो को श्वेत टाई व श्वेत वाह्य वस्त्र या फिर राष्ट्रीय पोषक में होना आवश्यक होता है। महिलाओं को संध्या काल में पहने जाने वाले गाउन में होना अनिवार्य होता है। आमंत्रित लोग भी पूर्ण मनोयोग से सज-धज कर उस राजसी समारोह व भोज में भाग लेते है। इस भोज के साथ ही नोबल पुरस्कार वितरण समारोह की समाप्ति होती है।

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